मासूम ख़तावार
कह नही सकते कि उस शख्श पे क्या गुजरती होगी जो ये जानता है कि जो गलती उसने नही की है फिर भी उसने सबसे उसके लिए माफी मांगी मगर किसी ने उसे मुआफ़ नही किया हो। किसी और के किये की सजा किसी और को मिलना कहाँ तक जायज है। पता नहीं कोई ऐसा शख्श भी रातों को कैसे सोता होगा जो जानता है फलां शख़्स ने वह जुर्म नही किया मगर उसने किसी और को बचाने की खातिर उसने सिर्फ जुर्म का एतिराफ़ किया है। सड़क पर लोग इकट्ठे थे। मैंने देखा एक कार सड़क के किनारे खड़ी थी और भीड़ बेतरतीब तरीके से एक रिक्शेवाले को घेरे थी। मैंने ध्यान दिया कि उसके रिक्शे का आगे वाला पहिया टूट गया था। देखते ही कोई भी बता देगा के इस गाड़ीवाले की टक्कर से ऐसा हुआ होगा। कारवाला सुटिड बूटिड था वहीं रिक्शेवाले पर ठंड से बचने लायक कपड़े भी बदन पर नही पहने थे। उसके चेहरे को गौर से देखा तो पाया कि मेरे आने से पहले उस पर दो चार लोगों ने हाथ साफ किया है। मेरे देखने तक भी रिक्शेवाले को गर्दन से पीछे तक कारवाले ने पकड़ा हुआ था। कारवाले कि हाइट मेरे हिसाब से रिक्शेवाले से एक फिट ऊपर रही होगी। आप सोचिए कि जब खुदा ने आपको किसी से हर एस्पेक्...